शीतला माता आरती का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है और भक्तजन देवी की आरती गाकर अपने परिवार की खुशहाली और स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करते हैं।
शीतला माता की आरती लिरिक्स | Shitala Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi :
॥ श्री शीतला माता की आरती ॥
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता।
आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता॥
ॐ जय शीतला माता…।
रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भाता।
ऋद्धि-सिद्धि चँवर डोलावें, जगमग छवि छाता॥
ॐ जय शीतला माता…।
विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता।
वेद पुराण वरणत, पार नहीं पाता॥
ॐ जय शीतला माता…।
श्री शीतला माता पूजन विधि | Shitala Mata Puja Vidhi in Hindi :
- सर्वप्रथम प्रातः स्नान आदि करके स्वच्छ हो जाएँ।
- शीतला माता के पूजन हेतु शीतल जल से स्नान करें।
- पूजन के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता, इसलिए एक दिन पहले भोजन तैयार करें।
- शीतला माता व्रत की कथा सुनें।
- मंदिर में धूप, दीप और नारियल से पूजा करें।
- शीतला माता की आरती गाएं और आशीर्वाद प्राप्त करें।
शीतला माता की उत्पत्ति | Shitala Mata Origin :
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता शीतला की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा से हुई थी। ब्रह्मा जी ने उन्हें पृथ्वीलोक पर जनकल्याण हेतु भेजा। माता शीतला ने पृथ्वी पर आते समय शिवजी के पसीने से उत्पन्न ज्वारासुर को भी साथ लाया और अपने भक्तों की रक्षा के लिए उन्हें आशीर्वाद दिया।
शीतला माता की पूजा का महत्व | Importance of Shitala Mata Worship :
शीतला माता की पूजा से रोगों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि माता शीतला के क्रोध को शांत करने के लिए ठंडे दूध और कच्ची लस्सी से उनका अभिषेक किया गया था। इस पूजा के माध्यम से भक्तजन अपने परिवार की रक्षा और सुख-शांति की कामना करते हैं।
इस आरती और पूजन विधि का पालन करके आप शीतला माता की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
