गोवर्धन आरती | Shri Govardhan Maharaj Aarti Lyrics in Hindi

गोवर्धन आरती का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। दीपावली के अगले दिन श्री गोवर्धन महाराज की पूजा की जाती है। उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित गोवर्धन पर्वत को श्री गोवर्धन महाराज के रूप में पूजा जाता है। ऐसी मान्यता है कि गोवर्धन महाराज की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और व्यक्ति को हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ, यह आरती गोवर्धन भगवान की सबसे लोकप्रिय आरती मानी जाती है। इस आरती का पाठ करने से श्री गोवर्धन देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

गोवर्धन महाराज आरती हिन्दी | श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ

श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,

तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,

तोपे चढ़े दूध की धार।

तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरी सात कोस की परिकम्मा,

चकलेश्वर है विश्राम।

तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरे गले में कण्ठा साज रहेओ,

ठोड़ी पे हीरा लाल।

तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

तेरे कानन कुण्डल चमक रहेओ,

तेरी झाँकी बनी विशाल।

तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण,

करो भक्त का बेड़ा पार।

तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।

गोवर्धन पूजा मंत्र | Shri Govardhan Puja Mantra

ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।।

प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:।।

नम: भगवते वासुदेवाय कृष्णाय।

क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:।

गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक।

विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव।।

लक्ष्मीर्या लोकपालानां धेनुरूपेण संस्थिता।

घृत वहति यज्ञार्थ मम पापं व्यपोहतु।।

इस आरती और पूजन विधि का पालन करके आप श्री गोवर्धन महाराज की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। यह पूजा आपके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाने में सहायक हो सकती है।

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